चमड़ी हमारे शारीर का सबसे बड़ा अंग है, और इससे हमारे शारीर में संक्रमण और अल्ट्रा वायोलेट किरणों से रक्षण मिलता है | चमड़ी हमारे शारीर का तापमान रेग्युलेट करती है| छोटे बच्चो की चमड़ी बड़ो से तिस गुना नाजुक और पतली होती है |
छोटे बच्चो को मसाज के लिए नारियेल तेल, सूर्यमुखी तेल या मिनरल ओइल का उपयोग करना चाहिए |
मसाज के लिए माबाप, दादा-दादी, केर टेकर या नर्स हो शकता है| मसाज करने वाले के नाख़ून लंबे नहीं होने चाहिए| और उसकी उंगलियोमें कोई ज्वेलरी या रिंग पहेनी नहीं चाहिए |
गर्मी में बच्चे को नहाने से पहेले और शर्दी में बच्चे को नहाने के बाद बच्चे को मसाज करे | बच्चे को एक या दो घंटे बाद मसाज करे |
मसाज करते समय बच्चा शांत, एक्टिव और एलर्ट होना चाहिए| कमसेकम पंद्रह से तीस मिनिट तक मसाज करे |
मसाज से बच्चे का सर्क्युलेसन बढेगा | वेगल टोन बढ़ने से गेस्त्रिन और इंस्युलिन का स्त्राव बढेगा | इससे पाचन अच्छा होगा | वजन और वृध्धि बढ़ेगी और मेंटल देवलोपमेंट अच्छा होगा| इसलिए छोटे बच्चो को मसाज करना अच्छा है, मुनासिब है |
तेल से मालिश करने से बेबी का कोर्टीसोल लेवल कम होगा और स्ट्रेसभी कम होगा | मसाज से थर्मोल रेग्युलेसन अच्छा होता है | पाचन और सर्क्युलेसन सिस्टम अच्छा होता है | स्लिप रिथम नियमित होती है | और न्युरोमोटर एक्टिविटी अच्छी होती है | इसकेलिए हम छोटे बच्चो को अच्छी तरह से मसाज करने की सलाह देते है |
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छोटे बच्चेमें मालिश करना कितना फायदाकारक है ?
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This blog is for informational purposes only and is not a substitute for professional medical advice. Always consult a healthcare professional regarding your child’s health. In case of an emergency, seek immediate medical attention.
बच्चे की
वृद्धि और विकास के साथ-साथ उसका वजन और लंबाई भी बढ़ती है। हालाँकि, हर
माता-पिता को यह शिकायत रहती है, कि बच्चे का वजन क्यों नहीं बढ़ रहा है? हर कोई
चाहता है कि उसका बच्चा खूबसूरती से बढ़े और उसका वजन और लंबाई बढ़े, लेकिन जब
सामान्य वजन वाले बच्चे का वजन कम होने लगे तो, यह स्वाभाविक और विशेष रूप से
चिंताजनक हो जाता है।
एक माँ की
शिकायत है कि बिना किसी अन्य बीमारी के बच्चे का वजन कम हो रहा है! अगर सच है, तो
मां से वजन के बारे में अतिरिक्त जानकारी मांगनी चाहिए। अगर मां को बच्चे के अगले
वजन का पता नहीं है, तो यह बताना मुश्किल हो जाता है, कि वर्तमान वजन कम हुआ है या
नहीं। लेकिन अगर मां कहे कि बच्चे के कपड़े पूरी तरह से उतर गए हैं, या पैंट
या पैंट बिल्कुल भी उतर गई है, तो इसे निश्चित तौर पर वजन कम होनाकहा जा
सकता है।
यदि संभव
हो तो आदर्श रूप से वजन करते समय, एक ही मशीन से वजन करना अनिवार्य है | हर बार
बच्चे का वजन लिया जाता है, तबउसके जूते, स्वेटर,ओवरकोट
आदि हटा देना चाहिए। वज़नकरते समय यह भी ध्यान देना चाहिए कि बच्चे ने खाना खाया है या नहीं।
बच्चों
में वजन कम होने के मुख्य कारण:
(1)बच्चेका खाना
कार्व वसा और प्रोटीनकी जरुरी मात्रा से कम हो, क्योंकि बच्चे वजन बढाने वाला खाना
खानेके बजाय, बहारका फास्टफूड ज्यादा पसंद करते है| बच्चेका मन खेलकूद में ज्यादा
होने से खाना कम खाते है |
(2)लंबे समयसे टीबी, किडनी जैसे संक्रामक रोगआदि।
(3)लंबे समयसे लगातार दस्त या उल्टी होना
(4)ऐसी स्थितियाँ जो बच्चे के मानसिक तनाव को बढ़ाती हैं।
(5)अस्थमा जैसी कुछ एलर्जी संबंधी बीमारियाँ।
(6)कुछ कैंसरयुक्त रोग जैसे रक्त कैंसर, मस्तिष्क कैंसर आदि।
(7)ऐसी स्थितियाँ जो अत्यधिक पेशाब का कारण बनती हैं जैसे बच्चों में मधुमेह, गुर्दे की
विफलता आदि।
(8) यदि थायरोक्सिन जैसी कुछ दवाएं ले रहे हैं।
(9) कुछ अंतःस्रावी ग्रंथियों के रोग जैसे थायरॉयड, एडिसन रोग
आदि
कम वजन वाले बच्चे की जांच:
बच्चे का रूटीन खाना उसके पोषणयुक्त
प्रमाण में है की नहीं वो माँ से पूछे | अगर ना हो तो माबापको वजन बढाने वाले खाने
का लिस्ट बनाके, बच्चेका रोजाना मेनु बनादे|
एक बार जब
यह निर्धारित हो जाए कि बच्चे का वजन बढ़ने के बजाय कम हो रहा है, तो इसका
निदान करने के लिए बच्चे की गहन जांच आवश्यक है।
यह
सुनिश्चित करना कि बच्चे को जो भोजन मिल रहा है वह पर्याप्त है या अपर्याप्त।
यदि बच्चे
को पुराना बुखार और खांसी है, तो छाती का एक्स-रे, बलगम और रक्त परीक्षण आवश्यक है। इससे पता चलता
है कि बच्चा टीबी से प्रभावित है या नहीं। हमारे देश में यह एक प्रमुख कारण माना
जा सकता है। एक सुखी परिवार में माता-पिता यह मानने को तैयार नहीं हैं, कि उनके
बच्चे को टीबी हो सकती है, लेकिन यह सच है। बच्चों को छाती के अलावा आंतों, किडनी या हड्डियों का भी टीबी हो सकती है। जो
उचित निदान परीक्षणों में पाया जाता है। समय पर उचित टीबी उपचार शुरू करने से
बच्चे का वजन वापस पाने में मदद मिल सकती है।
बच्चे के
मनोवैज्ञानिक कारणों की गहन जांच भी जरूरी है। माता-पिता के प्यार, स्नेहपूर्ण
पारिवारिक माहौल आदि और स्कूल में बच्चे के तनावपूर्ण रिश्तों आदि की जांच करना और
उनका इलाज करना आवश्यक है। यदि ऐसे मानसिक कारणों से भूख न लगे तो उसका उपचार करके
उचित लाभ प्राप्त किया जा सकता है। अगर बच्चा कुछ खायेगा ही नहीं, तो वजन बढेगा
कैसे ?
यदि बच्चे को लगातार दस्त या उल्टी हो रही है, तो दस्त
और उसके लक्षणों की जांच करें | यदि कार्बोहाइड्रेट, वसा या प्रोटीन में से कोई भीका पाचन ना हो रहा हो,तो इसके कारणों का पता लगाना आवश्यक है| इसके
अलावा पेचिश, आंत की पुरानी सूजन या गेहूं की एलर्जी के कारण भी स्थाई दस्त हो जाते हैं। जो
उचित इलाज से ठीक हो जाता है।
बच्चे के
रक्त परीक्षण से रक्त कैंसर आदि का पता चल सकता है। जबकि मूत्र परीक्षण से बच्चों
में मधुमेह या किडनी में सूजन आदि का पता लगाया जा सकता है। यदि बच्चा कोई दवा ले
रहा है, तो भी जानकारी आवश्यक है।
इतने सारे
परीक्षण करने के बाद भी अगर वजन कम होने का कोई कारण न पता चले तो शरीर में कहीं, जैसे
मस्तिष्क या छाती या कही भी छुपा हुआ कैंसर है तो इसकी जांच करानी चाहिए और
अंतःस्रावी ग्रंथि के कुछ रोगों को ध्यान में रखना चाहिए। ये सब आपका बालरोग
विशेषज्ञ देखके इलाज करेगा|
इलाज:
यदि बच्चे
के वजन कम होने का कारण पता चल जाए तो उपचार के बाद बच्चे का वजन बढ़ना शुरू हो
जाता है। बच्चे को अतिरिक्त कैलोरी और प्रोटीन युक्त खाद्य पदार्थ जैसे सूखे मेवे, दालें आदि
देने से वांछित वजन बढ़ सकता है। कैलोरी युक्त पौष्टिक आहार, पर्याप्त
नींद और आराम से बच्चा अपने मूल वजन को पुनः प्राप्त कर लेता है।
अत: घटते
वजन वाले बच्चे की उपेक्षा न करते हुए आवश्यकता पड़ने पर बाल रोग विशेषज्ञ से उचित
उपचार कराना चाहिए। इससे मधुमेह, टीबी जैसी स्थायी घातक बीमारियाँ, यातो समय
रहते कैंसर का निदान किया जा सके। जिसका शीघ्र उपचार करने से बच्चे की जान बचाने
में भी मदद मिलती है।
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दो से ढाई साल से कम उम्र के बच्चों में लार बहने की समस्या
माताओं को परेशान करती है। बच्चे के मुँह से गिरने वाली लार बच्चे की शक्ल खराब कर
देती है और माता-पिता सोचते हैं कि बच्चे में कोई दोष हैक्या ?
दांत निकलने के समय यानी छह महीने के बाद ज्यादातर बच्चों
के मसूड़े सिकुड़ने के कारण अधिक लार निकलने लगती है। यह समस्या उन बच्चों में
अधिक होती है जो मुंह से सांस लेते हैं। ऐसा लगता है कि इस प्रकार की लार कुछ
परिवारों में विरासत में मिलने की अधिक संभावना है।
लार क्यों और कहाँ उत्पन्न होती है?
हमारा मुंह में एक जैसे लार ग्रंथि प्रकृति ने तरल नमी बनाए
रखने के लिए लार का निर्माण किया है। जिससे पेट में खाना गीला, गूदेदार और सुपाच्य
हो जाता है। हमारे मुँह के दोनों ओर तीन जोड़ी लार ग्रंथियाँ होती हैं। (1) दोनों कानों के
नीचे बड़ी पैरोटिड ग्रंथियाँ (2) निचले जबड़े के नीचे की ग्रंथियाँ और (3) जबान के नीचे की
ग्रंथियाँ।
इस प्रकार, छह लार ग्रंथियों में स्वाभाविक रूप से लार का उत्पादन होता
है। जैसे ही भोजन चबाया जाता है, अधिक लार उत्पन्न होती है|
यदि भोजन स्वादिष्ट और सोडियमयुक्त है, तो पाचन के लिए
अधिक लार उत्पादन होता है। तब ऐसे भवता भोजन के खुश्बू के कारण अधिक लार बनने लगती
है और इसीलिए "भवता भोजन होने पर, लार गिरने लगी|" के मुहावरे का प्रयोग
करते हैं।
लार में 'टाइलिन' नामक एंजाइम भी होता है, जो कार्बोहाइड्रेट को पचाता है। इस
प्रकार भोजन का पाचन "मुह" से शुरू होता है।
बच्चे के मुंह में बनने वाली अतिरिक्त लार अंततः भोजन के
कणों के साथ गले में जाती है। इसलिए यदि बच्चे को भोजन निगलने की प्रक्रिया में
रुकावट आती है या मुंह और निगलने वाली मांसपेशियों के समन्वय में गड़बड़ी होती है, तो मुंह से लार
निकलने लगती है। बच्चों में अत्यधिक लार निकलने के कारणों का विवरण नीचे दिया गया
है।
(ए) मस्तिष्क या तंत्रिका तंत्र के दोष:
1. मानसिक रूप से विक्षिप्त बच्चा: यदि बच्चा किसी भी
कारण से मानसिक रूप से विक्षिप्त है, तो वह अधिक लार टपकाता है। इसके मुख्य कारणों में मंगोलिज्म, सेरेब्रल पाल्सी
शामिल हैं|(सीपी)
2. लकवा: यदि मुंह, जीभ या होठों की मांसपेशियां लकवाग्रस्त हो जाती हैं, तो बच्चा से लार
टपकाता है।
(बी) निगलने के कार्य में रुकावट:
1. जन्मजात दोष: यदि जन्म के बाद बच्चे को पानी या दूध देते समय मुंह
से झागदार तरल पदार्थ निकलने लगे तो अन्ननली में जन्मजात दोष हो सकता है। अन्ननली
और श्वासनली आगे या जुड़े हुए होते हैं|
ऐसे बच्चों की अन्ननलिका बंद हो तो नाक में कॉक डालने से
तुरंत निदान पता चल जाता है। ऐसी स्थिति में तुरंत बाल रोग विशेषज्ञ को दिखाकर और
ऑपरेशन के जरिए दोष को दूर करके बच्चे को बचाया जा सकता है।
2. संक्रमक रोग: बच्चों में डिप्थीरिया, रेबीज, टेटनस आदि गंभीर संक्रामक रोगों में ग्रासनली और गले में
रुकावट के कारण मुंह से झागदार श्लेष्मा स्राव होता है। आने पर बाल रोग विशेषज्ञ
को दिखाना चाहिए, बच्चे को भर्ती कर
इलाज शुरू करना चाहिए।
(ए) मों के अंदर सूजन:
यदि किसी कारण से मों के अंदर बच्चे में सूजन हो या चांदी
हो, तो लार ग्रंथियां
सुरक्षात्मक उपाय के रूप में अधिक लार का उत्पादन शुरू कर देती हैं। यह अतिरिक्त
लार बच्चे के मुँह से बाहर निकल जाती है।
(डी) कुछ दवाएं:
जैसे
क्लोनाज़ेपम, हेलोपरिडोल आदि
इसके चालू होने पर भी बच्चा लार टपकता हुआ प्रतीत होता है।
इस प्रकार, कभी-कभी बच्चे के पास अत्यधिक लार निकलने का कोई कारण नहीं
होता है, और कभी-कभी किसी
गंभीर संक्रामक रोग या मानसिक मंदता वाले बच्चे जैसी बीमारी को केवल इस प्रारंभिक
संकेत से पकड़ना आसान होता है। इसलिए जल्द से जल्द बाल रोग
विशेषज्ञ को दिखाना जरूरी है।
ठंड के मौसम में यदि बच्चे को लार अधिक आती हो तो लारिया
बांधना लाभकारी होता है। इसे समय-समय पर बदलने से स्वच्छता बनी रहती है। यदि बच्चा
लगातार गीला रहता है तो ठंड में सर्दी खांसी की संभावना बढ़ जाती है।
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