22 जुलाई, 2024

बच्चे का वजन कम होने लगे, तो इतनी बाते ध्यान रखे

 

बच्चे का वजन कम होने लगे, तो इतनी बाते ध्यान रखे 


  • एक साल से कम उम्र के बच्चे का हर महीने वजन करने से पता चल सकता है, कि उसका विकास कितना हो रहा है।
  • वजन कम होने की स्थिति में बाल रोग विशेषज्ञ से मिलें, और सभी निर्धारित परीक्षण करवाएं।
  •  एक बार जब कारण का पता चल जाता है, और उसका इलाज किया जाता है, तो वजन फिर से बढ़ना शुरू हो जाता है।

---------------------------------------------------------------------------------------------------------------------

बच्चे की वृद्धि और विकास के साथ-साथ उसका वजन और लंबाई भी बढ़ती है। हालाँकि, हर माता-पिता को यह शिकायत रहती है, कि बच्चे का वजन क्यों नहीं बढ़ रहा है? हर कोई चाहता है कि उसका बच्चा खूबसूरती से बढ़े और उसका वजन और लंबाई बढ़े, लेकिन जब सामान्य वजन वाले बच्चे का वजन कम होने लगे तो, यह स्वाभाविक और विशेष रूप से चिंताजनक हो जाता है।

एक माँ की शिकायत है कि बिना किसी अन्य बीमारी के बच्चे का वजन कम हो रहा है! अगर सच है, तो मां से वजन के बारे में अतिरिक्त जानकारी मांगनी चाहिए। अगर मां को बच्चे के अगले वजन का पता नहीं है, तो यह बताना मुश्किल हो जाता है, कि वर्तमान वजन कम हुआ है या नहीं। लेकिन अगर मां कहे कि बच्चे के कपड़े पूरी तरह से उतर गए हैं, या पैंट या पैंट बिल्कुल भी उतर गई है, तो इसे निश्चित तौर पर वजन कम होना कहा जा सकता है।

यदि संभव हो तो आदर्श रूप से वजन करते समय, एक ही मशीन से वजन करना अनिवार्य है | हर बार बच्चे का वजन लिया जाता है, तब उसके जूते, स्वेटर,ओवरकोट आदि हटा देना चाहिए। वज़न करते समय यह भी ध्यान देना चाहिए कि बच्चे ने खाना खाया है या नहीं।

बच्चों में वजन कम होने के मुख्य कारण:



  (1)   बच्चेका खाना कार्व वसा और प्रोटीनकी जरुरी मात्रा से कम हो, क्योंकि बच्चे वजन बढाने वाला खाना खानेके बजाय, बहारका फास्टफूड ज्यादा पसंद करते है| बच्चेका मन खेलकूद में ज्यादा होने से खाना कम खाते है |  

  (2)   लंबे समयसे टीबी, किडनी जैसे संक्रामक रोग आदि।

  (3)   लंबे समयसे लगातार दस्त या उल्टी होना

  (4)   ऐसी स्थितियाँ जो बच्चे के मानसिक तनाव को बढ़ाती हैं।


  (5)   अस्थमा जैसी कुछ एलर्जी संबंधी बीमारियाँ।

  (6)   कुछ कैंसरयुक्त रोग जैसे रक्त कैंसर, मस्तिष्क कैंसर आदि।

  (7)   ऐसी स्थितियाँ जो अत्यधिक पेशाब का कारण बनती हैं जैसे बच्चों में मधुमेह, गुर्दे की विफलता आदि।

  (8) यदि थायरोक्सिन जैसी कुछ दवाएं ले रहे हैं।

  (9) कुछ अंतःस्रावी ग्रंथियों के रोग जैसे थायरॉयड, एडिसन रोग आदि


कम वजन वाले बच्चे की जांच:

 

बच्चे का रूटीन खाना उसके पोषणयुक्त प्रमाण में है की नहीं वो माँ से पूछे | अगर ना हो तो माबापको वजन बढाने वाले खाने का लिस्ट बनाके, बच्चेका रोजाना मेनु बनादे|

 

एक बार जब यह निर्धारित हो जाए कि बच्चे का वजन बढ़ने के बजाय कम हो रहा है, तो इसका निदान करने के लिए बच्चे की गहन जांच आवश्यक है।

यह सुनिश्चित करना कि बच्चे को जो भोजन मिल रहा है वह पर्याप्त है या अपर्याप्त।

यदि बच्चे को पुराना बुखार और खांसी है, तो छाती का एक्स-रे, बलगम और रक्त परीक्षण आवश्यक है। इससे पता चलता है कि बच्चा टीबी से प्रभावित है या नहीं। हमारे देश में यह एक प्रमुख कारण माना जा सकता है। एक सुखी परिवार में माता-पिता यह मानने को तैयार नहीं हैं, कि उनके बच्चे को टीबी हो सकती है, लेकिन यह सच है। बच्चों को छाती के अलावा आंतों, किडनी या हड्डियों का भी टीबी हो सकती है। जो उचित निदान परीक्षणों में पाया जाता है। समय पर उचित टीबी उपचार शुरू करने से बच्चे का वजन वापस पाने में मदद मिल सकती है।

बच्चे के मनोवैज्ञानिक कारणों की गहन जांच भी जरूरी है। माता-पिता के प्यार, स्नेहपूर्ण पारिवारिक माहौल आदि और स्कूल में बच्चे के तनावपूर्ण रिश्तों आदि की जांच करना और उनका इलाज करना आवश्यक है। यदि ऐसे मानसिक कारणों से भूख न लगे तो उसका उपचार करके उचित लाभ प्राप्त किया जा सकता है। अगर बच्चा कुछ खायेगा ही नहीं, तो वजन बढेगा कैसे ?

 

 यदि बच्चे को लगातार दस्त या उल्टी हो रही है, तो दस्त और उसके लक्षणों की जांच करें | यदि कार्बोहाइड्रेट, वसा या प्रोटीन में से कोई भीका पाचन ना हो रहा हो,  तो इसके कारणों का पता लगाना आवश्यक हैइसके अलावा पेचिश, आंत की पुरानी सूजन या गेहूं की एलर्जी के कारण भी स्थाई दस्त हो जाते हैं। जो उचित इलाज से ठीक हो जाता है।

बच्चे के रक्त परीक्षण से रक्त कैंसर आदि का पता चल सकता है। जबकि मूत्र परीक्षण से बच्चों में मधुमेह या किडनी में सूजन आदि का पता लगाया जा सकता है। यदि बच्चा कोई दवा ले रहा है, तो भी जानकारी आवश्यक है।

इतने सारे परीक्षण करने के बाद भी अगर वजन कम होने का कोई कारण न पता चले तो शरीर में कहीं, जैसे मस्तिष्क या छाती या कही भी छुपा हुआ कैंसर है तो इसकी जांच करानी चाहिए और अंतःस्रावी ग्रंथि के कुछ रोगों को ध्यान में रखना चाहिए। ये सब आपका बालरोग विशेषज्ञ देखके इलाज करेगा|

इलाज:

यदि बच्चे के वजन कम होने का कारण पता चल जाए तो उपचार के बाद बच्चे का वजन बढ़ना शुरू हो जाता है। बच्चे को अतिरिक्त कैलोरी और प्रोटीन युक्त खाद्य पदार्थ जैसे सूखे मेवे, दालें आदि देने से वांछित वजन बढ़ सकता है। कैलोरी युक्त पौष्टिक आहार, पर्याप्त नींद और आराम से बच्चा अपने मूल वजन को पुनः प्राप्त कर लेता है।

अत: घटते वजन वाले बच्चे की उपेक्षा न करते हुए आवश्यकता पड़ने पर बाल रोग विशेषज्ञ से उचित उपचार कराना चाहिए। इससे मधुमेह, टीबी जैसी स्थायी घातक बीमारियाँ, यातो समय रहते कैंसर का निदान किया जा सके। जिसका शीघ्र उपचार करने से बच्चे की जान बचाने में भी मदद मिलती है।

 

                                          

 https://youtu.be/_3VgBRVo_Ro



Disclaimer:
This blog is for informational purposes only and is not a substitute for professional medical advice. Always consult a healthcare professional regarding your child’s health. In case of an emergency, seek immediate medical attention.

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

Thank you for visiting our Blog