ज्यादा मोबाइल देखनेवाले बच्चों के माबाप सावधान
आजकल लोग बच्चे बुड्ढे औरत मर्द सब लोग कंप्यूटर में टैबलेट्स में और मोबाइल में स्क्रीन देखते ही रहते है | यह एक आदत सी बन गई है | बच्चे
छोटे-छोटे बच्चे भी कार्टून सीरियल्स और गेम्स खेलते हुए बच्चों में गेम का एडिक्शन हो गया है जो
हेल्थ के लिए
खतरनाक है |
कितने समय तक बच्चों को उम्र के मोब स्क्रीन टाइम देखना चाहिए ये WHO रिकोमंडेशन देखते है
(1) 18 महीने से कम उम्र के बच्चों को मोबाइल या टीवी दिखाना नहीं चाहिए |
(2) 18 से 24 महीने के टॉडलर को एक घंटे से कम स्क्रीन टाइम देखना चाहिए |
(3) दो से पांच साल के बच्चों को वीक डे पर एक घंटा और वीक एन्ड पर तीन घंटे से कम स्क्रीन देखना चाहिए |
(4) 6 से 17 साल के बच्चे और टीनएजर दो घंटे स्क्रीन टाइम दूसरी फिजिकल एक्टिविटी के साथ देख सकते हैं, बीच में स्क्रीन ब्रेक अवश्य लेना चाहिए |
आजकल के बच्चे खाने पर मोबाइल की डिमांड करते हैं, जो मोबाइल ना मिले तो गुस्सा करके रोने बैठ जाते हैं और पैरंट उसके हाथ में मोबाइल थमा देते हैं यह गलत है | इससे बच्चों को लत पड़ जाति है और मोबाइल देखें बिना खाना ही नहीं खाता | इसलिए पेरेंट्स को गुजारिश है की ये आदत डाले ही नहीं |ज्यादा स्क्रीन टाइम बच्चों की सोशल एक्टिविटी और स्किल कम कर देते है | ऐसे बच्चों में ओबेसिटी, अनियमित निद्रा, बिहेवियर समस्या, पढ़ने में कमी, सर दर्द, गुस्सा करना और समस्या सुलझाने की स्किल में कमी आकर दिमाग फ़ोगी बन जाता है |
नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ हेल्थ के स्टडी के मुताबिक, जो बच्चे 2 घंटे से ज्यादा मोबाइल देखते
ही रहते हैं, उसके वर्तन में बदलाव और यादशक्ति
में कमी होने लगती और जो बच्चे पांच घंटे से ज्यादा मोबाइल देखते उसकी ब्रेन की कोरटेक्स पतली होने लगती है | जो विचार
और नैसर्गिक याद शक्ति के लिए जरूरी है | ऐसे बच्चे अगर लंबे समय तक स्क्रीन देखते
रहेंगे तो उसके वर्तन में बदलाव आएगा और ओसीडी यानी ऑब्सेसिव कंपल्सिव डिसऑर्डर भी
होने लगता है | बच्चों की हेल्थ पर विपरीत असर से नींद कम, बीपी ज्यादा, एचडीएल कम, स्ट्रेस
रेगुलेशन, कम होने
लगता है | बच्चों में डिप्रेशन लेवल बढ़ता है | बच्चों के दिमाग की कोशिका कनेक्शन डिस्टर्ब होने से ध्यान केंद्रित
करने की शक्ति
कम हो जाति है | मोबाइल के रेडिएशन से लंबे समय बाद बच्चों को ब्रेन ट्यूमर होने का खतरा बढ़ता है |
मोबाइल कान के पास एक घंटा रखना से 1 मिनट माइक्रोवेव ओवन की गर्मी हिट से अंदर आएगी | ज्यादा मोबाइल देखने वाले बच्चों की आंखों में स्ट्रेन दर्द, धुंधला दिखाना, वगैरा हो सकता है | आंखों के कांस्टेंट नजदीकी
से बच्चों को नियर विजन चश्मा आ सकते हैं, और लंबे समय तक स्क्रीन देखने से मैकुलर डिजनरेशन हो सकता है | लॉकडाउन में ज्यादा घर बैठने और ऑनलाइन पढाईसे बच्चे
इसके बहुत आदि
हो गए | जो रोकना जरूरी है |
इससे बच्चे को बचाने के लिए ?
1 एक के बाद एक टिप्स में बता रहा हूं |
2 सबसे पहले बच्चों को आदत ना डाले |
3 खाते समय मोबाइल दूर रखें |
4 बच्चे से बात करके उसे अटेंड करें |
5 उसे स्क्रीन के नुकसान समजाये|
6 स्क्रीन टाइम शेड्यूल समझा करे फिक्स करें |
7 बच्चों को बाहर आउटिंग में ले जाए |
8 आउटडोर गेम्स खेलने प्रोत्साहित करें |
9 उसका ध्यान दूसरी एक्टिविटी में लगाए |
10 गाना बजाना, डांसिंग बाग, विगेरेसे मोबाइल से ध्यान हट जाएगा |
11 टेक्नोलॉजी फ्री एरिया घर में ही बनाए |
12 डाइनिंग रूम किचन सिर्फ खाने पीने और बातचीत के लिए रखे| यहां स्क्रीन की एंट्री बंद करें |
13 आंखों के रक्षण के लिए एंटी ग्लेयर ग्लासेस एंटी ग्लेर ग्रीन चश्मे का यूज़ करें |
14 रूम में फूल लाइट रखें
15 स्क्रीन बच्चे की आंख से आधे से 1 मी दूरी पर रखें |
16 आंख से 15 से 20 डिग्री नीचे स्क्रीन रखें |
17 बीच-बीच में आंखें बंद करवाएं |
18 ब्लू लाइट फिल्टर स्क्रीन पर लगाएं |
19 पढ़ने समय फोंट की साइज बड़ी रखें |
20 तभी बच्चे की आंखें का आरक्षण अच्छी तरह से हो
सकेगा |




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