02 अगस्त, 2024

आवाज़ कर्कश हो जाय तो उसे मधुर कैसे बनाये ?

 

आवाज़ कर्कश हो जाय तो उसे मधुर कैसे बनाये ?

·        स्वरपेटी में सूजन, ट्यूमर, रसौली आदि आंतरिक कारणों से आवाज बैठ जाती है।

·        कुछ शारीरिक कारणों जैसे थायराइड की कमी, उम्र बढ़ना आदि के कारण भी आवाज बैठ जाती है।

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स्वर रज्जु ध्वनि उत्पन्न करने के लिए जिम्मेदार है। ध्वनियाँ स्वर रज्जुओं के अंदर दो स्वर रज्जुओं के विभिन्न प्रकार के कंपनों से उत्पन्न होती हैं। मस्तिष्क से विभिन्न कंपन, आदेश, विभिन्न ध्वनियाँ उत्पन्न करने के लिए तंत्रिकाओं के माध्यम से प्रसारित होते हैं। चूंकि बचपन में स्वर रज्जु पतले होते हैं, उनके कंपन की तीव्रता अधिक होती है और इस प्रकार आवाज छोटी, पतली और स्त्रियोचित लगती है। जब कोई लड़का 14 से 16 वर्ष की आयु तक पहुंचता है और युवावस्था शुरू करता है, तो सेक्स हार्मोन के प्रभाव में स्वर रज्जु मोटी होने लगती है, जिससे आवाज पुरुषों की तरह मोटी हो जाती है। कभी-कभी किसी को 18 से 20 साल तक इंतजार करना पड़ता है, कभी-कभी वयस्कता में पुरुष स्वर रज्जु  पतले रह जानेसे, आवाज महिलाओं की तरह पतली होती जाती है। और इसलिए उन्हें सार्वजनिक रूप से बोलने में शर्म आती है। जिसको बोलने की आदत अच्छी नहीं है, और वह हमेशा चिल्लाता रहता है तो उसका आवाज कर्कश हो सकता है| आवाज का ज्यादा उपयोग और चिल्लाना आवाजको कर्कश बनाता है|

इसके अलावा आवाज बैठने के दो मुख्य कारण माने जा सकते हैं।

(ए) स्वर रज्जु के कारण|

(बी) स्वर रज्जु के अलावा अन्य शारीरिक कारण।

इन दोनों का विस्तृत विवरण देखते है।

आवाज बैठने के कारण :

(ए) स्वर रज्जु के कारण:

(1) स्वर रज्जु में सूजन : सर्दी, कफ, या अन्य कारणों से सूजन के कारण कुछ समय के लिए आवाज बैठ जाती है।

(2) यदि स्वर रज्जु  के अंदर मस्सा, सिस्ट या ट्यूमर हो तो आवाज कर्कश होती है।

(3) नवजात शिशु के जन्म के समय स्वर रज्जु में चोट लगने के कारण आवाज या रोना कर्कश हो जाता है।

(4) स्वर रज्जु के संक्रामक रोग जैसे टीबी, डिप्थीरिया या सिफलिस आदि।

(5) यदि स्वरपेटी के अंदर कोई बाहरी वस्तु जैसे स्क्रू, बटन, बी आदि फंसा दी जाए तो अचानक आवाज कर्कश हो जाती है।

(6) स्वरपेटी का केन्सर

(बी) स्वर रज्जु के बाहरी कारण:

(1) यदि स्वर रज्जु में कंपन पैदा करने वाली तंत्रिका दब जाती है या घायल हो जाती है, तो आवाज कर्कश हो जाती है।

(2) "सुक्तान, मायस्थेनिया ग्रेविस" आदि शारीरिक रोगों के कारण स्वर रज्जु की मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं।

(3) थायरॉयड ग्रंथि की कमी: से आवाज जन्म से या बाद में कर्कश हो जाती है। इसका निदान रक्त में इसके हार्मोन की मात्रा से किया जा सकता है।

(4) समय से पहले यौवन: हार्मोनल गड़बड़ी के कारण कभी-कभी 8 से 10 साल के बच्चों में यौवन परिवर्तन दिखाई देता है। उसकी दाढ़ी बढ़ने लगती है, मूंछें, लिंग और अंडकोष तेजी से बढ़ने लगते हैं और आवाज भारी हो जाती है, जिसे "असामयिक यौवन" कहा जाता है।

(5) GERD : इसे गेस्ट्रो इसोफेजियल रिफ्लक्स कहेते है| सोते समय जठर का एसिड बहार आकर स्वरपेटीको डेमेज करता है| इससे आवाज कर्कश हो जाति है|

उपचार: मरीज को अच्छा स्वर और बोलने का ढंग सिखाया जाना चाहिए। बच्चे को बहुत जोर से चिल्लाते समय चुप रहना और स्वरयंत्रों को आराम देना सिखाना जरूरी है। इसके लिए 'स्पीच थेरेपिस्ट' की मदद ली जा सकती है।

स्वर रज्जु के भीतर के कारणों की जांच लैरिंजोस्कोप का उपयोग करके की जा सकती है। अंदर की बाहरी वस्तु को हटाने के बाद आवाज सामान्य हो जाती है। यदि कोई मस्सा या ट्यूमर है, तो उसे सर्जरी से हटाया जा सकता है, स्वर रज्जु की सूजन या संक्रमण का इलाज जारी रहने पर आवाज में सुधार होने लगता है।

GERD की सारवार से स्वरपेटी अच्छी होने से आवाज मधुर होने लगती है |

थायरॉयड ग्रंथि की कमी का निदान होते ही उपचार शुरू कर देना चाहिए, अन्यथा बच्चा स्थायी रूप से मंदबुद्धि हो जाएगा।

स्वर रज्जु को नियंत्रित करने वाली तंत्रिका के संपीड़न या चोट के लिए तत्काल उपचार की जरूरत होती है, अन्यथा मरीज का दम घुट सकता है।

यदि उम्र बढ़ने के कारण स्वर रज्जु की मांसपेशियों में कमजोरी है, तो कैल्शियम और विटामिन-'डी' फायदेमंद हो सकता है, और यदि मायस्थेनिया है, तो उपचार से आवाज में सुधार होगा। स्वर रज्जु के केन्सर का इलाज़ इसका तजज्ञ करता है |

इस प्रकार, गला बैठना मुख्य रूप से स्वर रज्जु रोग माना जा सकता है, लेकिन इसके साथ कुछ शारीरिक रोगों का भी निदान किया जा सकता है। आवाज को आराम, चिल्लाना बंद, स्पिचथेरापी और गरमपानी में नमक डालके कुल्ले से भी आराम लगता है|

कायमी आवाज़ को मधुर बनाने आपको लाइफस्टाइल बदल के स्पिच थेरापी और ट्रेनिंग लेनी पड़ेगी, जो अच्छे गायक और वक्ताके लियेप जरुरी है | 

दोस्तों, इस तरह उपचार करके आप कर्कश आवाज मधुर और सुरीली बना शकते है|






Disclaimer:
This blog is for informational purposes only and is not a substitute for professional medical advice. Always consult a healthcare professional regarding your child’s health. In case of an emergency, seek immediate medical attention.

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