30 सितंबर, 2024

"बचपन का मोटापा: हर माता-पिता को क्या पता होना चाहिए"

 

"बचपन का मोटापा: हर माता-पिता को क्या पता होना चाहिए"


आजकल के जमाने में मोबाइल, नेट, टीवि, चैनल्सके अति आक्रमण से बच्चे ने आउटडोर गेम्स बिल्कुल बंद कर दिए। घर में बैठे बैठे वो मोबाइल इधर उधर करते हैं, और टीवी में कार्टून चैनल्स देखा करते हैं। इसकी वजह से बच्चे का वजन बढ़ने लगता है। और ओबेसिटी का प्रॉब्लम दिन ब दिन बढ़ता जा रहा है। हमारे विकसते देश की तुलना में विकसित देश जैसे यु एस ए, यु के, ऑस्ट्रेलिया में ओबेसिटी एक हेलथ प्रॉब्लम बन गया है, और वहाँ का हेल्त डिपार्टमेंट भी ओबेसिटी, बच्चों में वजन कम कैसे करें, उसके लिए ज्यादा चिंता करके कार्यरत है| हमारे पास भी अच्छे घरानेके, सुखी घरानेके माँबाप आके के कहते, डॉक्टर साहब, बच्चा बहुत मोटा हो गया है। इसका वजन कैसे कम करें?

चलो हम देखते हैं उसकी वजह क्या है, और कैसे हम वजन कम कर सकते? मोटे और ओबेस माँबापके बच्चे हेरिडीटरी होते है| 30-40 परसेंट केसों में ये जीन्स के माध्यम से ट्रांसमिट होते, अगर माँ बाप बच्चों के खान पान और लाइफ स्टाइल पर कंट्रोल करे, तो इसके बच्चे ओबेस नहीं होते।

सामान्यतः बड़े लोगों में बी एम आई की गिनती से ओबेसिटी का निदान होता है। बेजिक मेटाबोलिक इंडेक्स, यानी वजन किलो में डिवाइडेड बाय उचाई स्क्वायर मीटर में 18 से 25 तक का बी एम आई नॉर्मल है। 25 से 35 बी एम आई ओवर वेइट है, और 35 से ऊपर बी एम आई वाला बच्चा या आदमी ऑबेस कहलाता है। 

बच्चों में ओबेसिटी का असेसमेंट करने के लिए आई.सी.एम.आर. के वजन के चार्ट को उपयोग में लेते हैं। और वो चार्ट में हम बच्चे की वजन का ग्रोथ माउंट करते है। अगर ये ग्राफ 95 परसेंटाइल से ऊपर चला जाए तो समझ लो, बच्चा ओबेस हो गया है। माँ बाप सोचते हैं उसका बच्चा हेल्ती है, लेकिन वजन के हिसाब से वह ओबेस होता है। 2 साल तक बच्चों के बच्चों में फेट सेल्स का निर्माण हो जाता है। इसलिए पेरेंट्स से सलाह है की शुरुआत से ही बच्चे के वजन पर निगरानी रखे।

ओबेस बच्चे में पसीना, ज्यादा थकान, जोड़ों का दर्द, असिड रिफ्क्लक्ष, हार्टबर्न, फैटी लिवर और नींद में कर्राटे जैसे कॉम्प्लीकेशन्स ज्यादा दिखते हैं। आगे बढ़ते ओबेस बच्चों में टाइप टू डायबिटीज़ ब्लड प्रेशर, अस्थमा, हार्ट बर्न और अटैक, हाई कोलेस्ट्रॉल फैक्टरी लिवर और गोल स्टोन की संभावना बढ़ जाती है। इसलिए शुरुआत से ही बच्चे का वजन कंट्रोल करना फायदेमंद है। 

अब देखते हैं वजन कम कैसे करें? सबसे पहले बच्चे का खानपान कंट्रोल करें। पहली बात बच्ची ज्यादा फुडी बनकर जंक फुड, पिज़्ज़ा, पास्ता, कोकीस, ज्यादा शुगर वाला खाना खाते ही रहते हैं, और ये सब बाहर का होटल का खाना उसे मोटा बनाके, वजन बढ़ाते हैं। 

इसके बदले बच्चों को हेल्ती खाना बैलेंस आहार दे, जिसमें 50% कार्बोहाइड्रेट, 30% प्रोटीन, और 20% फेटसे कैलोरी मिले। अच्छे किस्म के कार्बोहाइड्रेट बच्चे को आप फ्रूट्स, सलाद, और अच्छे किस्म के प्रोटीन में सोया, दाल, अंडे देने से बच्चों की कैलोरी इंटेक ज्यादा नहीं होगी।

बच्चों को ज्यादा खाने के लिए पेंपर ना करें। बच्चा ये खा ले बेटा ये कर, ये अच्छा टेस्ट में है, खा ले ऐसा करने से बच्चा ज्यादा खाता ही रहेगा। प्लेट खाली करने का आग्रह ना करें। खाने में डन बोले तो खाना बंद करा दे| टेस्टी खाना के बदले हेल्धी  खाने पर ध्यान दे। खाने खाते समय में बच्चा मोबाइल या टीवि ना देखे वरना उसका ध्यान स्क्रीन पे ही रहेगा, और कितना खाया, खाने में कंट्रोल बिलकुल नहीं रहेगा।

पूरा फैम्ली साथ में खाने बैठे और आप भी बच्चे जैसा ही हेल्धी फुड खाये। रात का खाना 8:00 बजे से पहले खाये, ताकि सोने से पहले पाचन हो जाए, और उनहेल्थी फेट शरीर में जमा ना हो। माइंडफुल ईटिंग करे, बच्चा घर में रहे, मोबाइल, टीवि स्क्रीन देखता ही रहेगा, तो कैलोरी जमा हो के वजन बढ़ता ही रहेगा। डब्ल्यू.हेच.ओ.गाइडलाइन्स के मुताबिक, 1 घंटे से ज्यादा बच्चे को स्क्रीन देखने ना दे। या तो फिर बंद करा दे| 



आउटडोर गेम्स, कसरतें, जिम, चलना, साइक्लिंग, स्विमिंग ये सब एंकरेज करें। जितना कैलोरी कम होगा, उतना ही वजन कम होगा। कसरतें नियमित, हर रोज़ करें, बीच में बंद ना करें।

 

बच्चे का स्ट्रेस, तनाव और डिप्रेशन की जानकारी लेके खत्म करें। साइकेट्रीक की हेल्प भी ले सकते हैं| स्ट्रेस वाला बच्चा खान पान में ध्यान नहीं रखता और ओवर ईटिंग से ओबेस बनता ही जाता है। मेडिटेशन या तो योगा का भी प्रयोग कर सकते हैं। बच्चा अच्छी पर्याप्त मात्रा में यानी कि 8-10 घंटे की नींद ले। देर तक जागने से और कम नींद से बच्चे के शरीर में लेप्टिन नामक हार्मोन से बच्चे की भूख बढ़ेगी, और ज्यादा खाने से वजन बढ़ता रहेगा। बच्चों में थायराइड हार्मोन की कमी जिसे हम हाइपोथायरॉयड बोलते हैं और कोर्टिसोल हार्मोन ज्यादा होने पर जिसे हम कसिंग सिन्ड्रोम कहते हैं, ओबेसिटी दिखती है।

अपने डॉक्टर की सलाह के अनुसार एन्डोक्राइनोलॉजिस्ट को कंसल्ट करके उसकी सरवार कराए| सरवार के बाद बच्चे की ओबोसिटी भी अपने आप धीरे धीरे कम हो जाएगी। बच्चे को नेफोटिक सिन्ड्रोम या अस्थमा में लॉन्ग लास्टिंग,  कोर्टीसोल, सोडियम वॉलप्रोएट, ऐंटी डिप्रेशन जैसी दवाई अगर लंबे समय तक चलती है, तो ओबेसिटी उसकी साइड इफेक्ट के रूप में दिखती है। अपने डॉक्टर की सलाह लेके दवा को बदलना जरूरी हो जाता है। बड़े हुए अडोलेसेंट बच्चों में डॉक्टर की सलाह मुताबिक दवाई से वजन कंट्रोल करके हम वजन कम कर सकते हैं, लेकिन ये अडोलेशन बच्चों में ही प्रयोग करें।

बड़े बच्चों में ये सब इलाज अगर रीज़ल्ट ना दे तो, सर्जरी से भूख, खाना, और वजन कम कर सकते हैं। इसमें गॅस्ट्रिक बाइपास, गैस्ट्रिक बैंडिंग, गैसट्रेक्टोमी जैसे ऑपरेशन से बच्चे का खाना और भूख कम करके वजन कम कर सकते हैं। लाइपोइड सक्सेस से भी ज्यादा फैट निकालने पर वजन कम होता जाता है।

बच्चों में जेनेटिक सिंड्रोम जैसे लॉरेंसमुनबिडाल सिन्ड्रोम, कोहेन्स, डाउन, टर्नर, सिंड्रोम वगैरह में ओबेसिटी साथ में सिम्प्टम के रूप में देखने को मिलती है। अपने डॉक्टर से निदान करा के, सिम्टोमेटिक ट्रीटमेंट करके वजन कंट्रोल कर सकते है।

इस तरह बच्चा अगर हेरिडीटरी ओबेस ना हो, और कोई भी सिन्ड्रोम ना हो, तो नियमित कसरत, रेगुलर एक्सर्साइज़, पर्याप्त मात्रा में नींद, खानपान में कंट्रोल, डब्लूहेचओ गाइड लाइन के मुताबिक सिर्फ 1 घंटे ही स्क्रीन देखना, बाकी के समय में आउटडोर गेम्स खेलना, एसी ये सब सलाह का अगर पालन करेगा तो बच्चे की ओबेसिटी कम होने वाली है। इसमें शंका की कोई जगह नहीं है |


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Disclaimer:

This blog is for informational purposes only and is not a substitute for professional medical advice. Always consult a healthcare professional regarding your child’s health. In case of an emergency, seek immediate medical attention.

 

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