एलर्जिक अस्थमा के कारण समजो और उससे बचते रहो
• कई एलर्जी से अस्थमा होने की संभावना होती है।
• बच्चा अस्थमा से प्रभावित होगा या नहीं, इसके कारकों की
भी जानकारी होनी चाहिए।
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जैसे ही मरीज विभिन्न एलर्जन के संपर्क में आता है, उसे एलर्जिक
अस्थमा का दौरा पड़ जाता है। उसकी श्वासनली अंदर से सिकुड़ती और सूज जाती है, बच्चा ज्यादा सांस लेने लगता है। अब तक अस्थमा पैदा
करने वाले कई एलर्जेन पकड़े गए हैं|
(1) घर में सूक्ष्म
धूल जो हवा में उड़ती है और सफाई तथा सरसराहट के समय अधिक वायुवाहित हो जाती है।
(2) घर में बिस्तर, कालीन, फर्नीचर आदि में
पाए जाने वाले सूक्ष्म जीव जिन्हें 'माइट्स' कहा जाता है। जो एलर्जिक अस्थमा में अहम भूमिका निभाता है।
इन घुनों को जीवित रहने के लिए भोजन के रूप में नम वातावरण और त्वचा की आवश्यकता
होती है। जैसे-जैसे त्वचा की एपिडर्मिस चादरों और गद्दों में घुसती जाती है, उसमें इन कीटों
की संख्या अधिक हो जाती है। अस्थमा के रोगी के सोने वाले कमरे में चादर, कालीन, पर्दे आदि को रुई
के बजाय प्लास्टिक में रखने और बार-बार धोने की सलाह दी जाती है।
(3) वायुजनित कवक
बीजाणु।
(4) पालतू जानवरों
जैसे बिल्ली, कुत्ते आदि के
बाल जो हवा में बारीक उड़े हुए होते हैं।
(5) घरेलू पक्षी जैसे गौरैया, कबूतर के पंख और पंख जो सूक्ष्म रूप में हवा में उड़ रहे हैं।
(6) तिलचट्टे, खटमल आदि घरेलू
कीड़ों के वायु-जनित स्राव।
(7) घर में नमी या नम
स्थान और वातावरण
(8) तेजी से बदलता
वातावरण, यानी गर्म से
ठंडा और ठंडे से गर्म - उदाहरण के लिए, जब एक वातानुकूलित कमरे से गर्म धूप वाले कमरे में जाना और
वापस वातानुकूलित कमरे में जाना।
(9) प्रदूषित वातावरण
में धुआं, धुंआ, कण पदार्थ आदि के
संपर्क में आना।
(10) जब दाल की महक या
रसोई में पकी हुई कुछ चीजों या मिर्च मसाले आदि की महक हवा में उड़ रही हो और
बच्चा रसोई में आ जाए।
(11) हवाई फूल पराग के
संपर्क में आने पर, जो केवल कुछ
मौसमों में होता है। इसलिए,
अस्थमा से पीड़ित
बच्चे के माता-पिता इस बारे में सोच सकते हैं।
(12) ऐसी एलर्जी वाले
रोगी के घर और सोने के कमरे में घर में पौधों या फूलों की पत्तियाँ यानी कोई भी
पत्तियाँ नहीं रखनी चाहिए।
(13) पफ, पाउडर, परफ्यूम या अन्य
सौंदर्य प्रसाधनों की तेज़ गंध के संपर्क में आना।
(14) मच्छर की तेज गंध, मच्छर की दवाएं, दुर्गन्ध, कछुए की छाप धूप
या धुएं के संपर्क में आना।
(15) एसिड, बेंजीन आदि
विभिन्न प्रकार के रसायनों का धुआं और वह ! गंधों के संपर्क में आना
(16) धूम्रपान करना, स्वयं को प्रेरित
करना या किसी अन्य व्यक्ति के धुएं के संपर्क में आना।
(17) कारखानों, मिलों, आदि से
निकलने वाली कालिख और धुएं केसंपर्क में आना।
(18) ऊनी कपड़ों, टेरीलीन या
नायलॉन के कपड़ों या इसकी उड़ती कणिका के संपर्क में आने से।
(19) कुछ प्रोटीन
युक्त खाद्य पदार्थ जैसे मटन, मछली, अंडे, दूध,
दालें या मूंगफली
आदि खाना।
(20) किण्वित भोजन या
खट्टा भोजन जैसे चटनी, ढोकला आदि खाना।
(21) ठंडा खाना, जमा हुआ पानी, बर्फ, कुल्फी, आइसक्रीम आदि
खाने से।
(22) कुछ दवाएं जैसे
एस्पिरिन, एंटीबायोटिक्स
आदि लेना।
(23) रक्त और रक्त
उत्पादों को इंजेक्ट या संक्रमित करके |
(24) कुछ टीके, एंटीसीरम आदि|
(25) किसी संक्रामक
वायरस या बैक्टीरिया के संपर्क में आने से या बच्चे के पेट में करमिया की
प्रतिक्रिया के कारण भी अस्थमा देखा जाता है।
इतनी लंबी सूची से कि मरीज किस चीज के संपर्क में आया है और
अस्थमा क्या हैदौरा पड़ा है, तीन-चार बार के बाद समझदार मरीज या माता-पिता को समझ में
आने लगता है। इसमें दो या तीन या अधिक चीजों से एलर्जी हो सकती है, इसलिए यह जानना
मुश्किल है कि अस्थमा का कारण क्या है। और कुछ मामलों में बिना किसी कारण के भी
बच्चे की सांस फूलने लगती है।
इसके अलावा यह जानना भी जरूरी है कि बच्चे को अस्थमा होगा या नहीं और उसके अस्थमा के उतार-चढ़ाव को प्रभावित करने वाले कारक क्या हैं।
(2) बदलता मौसम: बदलते मौसम में
बच्चे को अस्थमा का दौरा अधिक पड़ता है। नम हवा और ठंडी हवा से एलर्जी वाले बच्चों
को मानसून और सर्दियों में अस्थमा के दौरे अधिक पड़ते हैं। जबकि गर्मियों में ये
काफी अच्छा हो जाता है.
(3) मानसिक तनाव : शोक, भय, तनाव, झड़प, चिंता आदि
तनावपूर्ण स्थितियों में अस्थमा के दौरे पड़ने की संभावना
अधिक होती है। पुरुषों की तुलना में महिलाओं में मनोवैज्ञानिक कारक अधिक प्रभावी
प्रतीत होते हैं।
(4) व्यायाम और
दौड़ना: छोटे बच्चे को कभी-कभी दौड़ने या व्यायाम करने के बाद
अस्थमा का दौरा पड़ता है।
(5) संक्रामक रोग: श्वसन तंत्र के
संक्रामक रोग, फुफ्फुसीय टीबी
वाले बच्चे में अस्थमा के दौरे की संभावना बढ़ जाती है। कभी-कभी ये संक्रामक वायरस
या बैक्टीरिया स्वयं एलर्जी के रूप में कार्य कर सकते हैं और अस्थमा के दौरे को
ट्रिगर कर सकते हैं।
(6) हार्मोन: लड़कियों में
मासिक धर्म के दौरान अस्थमा का दौरा पड़ता है, जबकि कुछ को रजोनिवृत्ति की शुरुआत में अस्थमा के दौरे में
लाभ होता है।
अतिसक्रिय थायराइड से अस्थमा के दौरे भी बढ़ जाते हैं।
ये सब कारक जानने के बाद हम अस्थमासे बच्चो को बचा सकते है| विरासतमें मिला अस्थमा से कुछ नहीं हो सकता, लेकिन दुसरे कारक कम करके हम अस्थमा के एटेक कम कर सकते है|
Twitter - https://x.com/HarshadKam2312
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