प्रारंभिक बालविकास
बच्चे की अवधि के पहले छह वर्ष 'शैशवावस्था' और 'प्रारंभिक शैशवावस्था' होते हैं। इस अवधि के दौरान बच्चे के शारीरिक, भाषाई, बौद्धिक और भावनात्मक विकास की गति सबसे तेज़ होती है। इस अवधि के दौरान अर्जित कौशल बाद में प्राप्त नहीं किये जा सकते।
प्रतिकूल विकासात्मक स्थितियाँ जैसे अपर्याप्त पोषण, पालन-पोषण के तरीकों में दोष आदि मौजूद होने पर बाधक बन जाते हैं। जिसका बाद के वर्षों में विकास नहीं हो पाता।
इस दौरान बच्चे में आत्म-सम्मान की भावना विकसित होती है। इस अवधि में
सकारात्मक अनुभव आवश्यक हैं। इन वर्षों के दौरान सुरक्षा और आत्मविश्वास की नींव
विकसित होती है,
इसलिए इन वर्षों
के दौरान एक बच्चे के पास विकास के लिए उपयुक्त वातावरण और पर्याप्त अवसर होने
चाहिए।
बालविकास अध्ययन का महत्व एवं उपयोगिता
बाल विकास का अध्ययन विभिन्न उम्र के बच्चों के व्यवहार को समझने और उनका
मार्गदर्शन करने में सहायक होता है। इसके मापदंड से हम बच्चे की प्रगति का
मूल्यांकन कर सकते हैं और इससे बच्चे के विभिन्न खेलों और सीखने की गतिविधियों की
योजना बनाई जा सकती है।
इसके अलावा,
अविकसित बच्चे
की शीघ्र पहचान और उपचार से बच्चे को मानसिक मंदता से बचाया जा सकता है।


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